आओ नया साल कुछ इस तरह से मनाएँ,
किसी उदास चेहरे को हंसा कर दिखाएँ |
दादी गिर पड़ी है , आँखों में रोशनी नहीं है,
चलो कुछ समय निकालकर, उन्हें चश्मा दिला लाएँ |
सूज चुकी है बूढ़े पिता की आँखें, बेटे के आने के इंतजार में,
चलो कुछ समय को, उनके बेटे हम बन जाएँ |
सड़क किनारे वो अम्मा, कितनी देर से खड़ी हैं,
चलो उसकी हथेली पकड़कर, उस पार हम कराएँ |
खामोश हो गई है बहना, घर की परिस्थितियाँ समझकर,
चलो अपने कंधे मिलाकर, उनकी डोली हम उठवाएँ |
भाई मायूस हो गया है, अपने सपनों को देखकर बिखरते,
चलो संग बैठें उसके, उसकी आँखों में नये सपने हम सजाएँ |
खो चुके हैं जो बहुत कुछ, नियति के कहर में,
चलो ऐसे लोगों की दुनियाँ, फिर से हम बसाएँ |
कुछ देर के लिए, भूलें हम खुद को,
कुछ देर के लिए, हम सबके हो जाएँ |
बाँटें छोटी-छोटी खुशियाँ, छोटे-छोटे गम बँटाएँ,
आओ नया साल कुछ इस तरह से मनाएँ |
-नववर्ष के शुभकामनाओं सहित, राजेश रंजन ‘आर्य‘
December 31, 2008 at 7:16 am |
बहुत ही अच्छी कविता.
आप तथा आपके पूरे परिवार को आने वाले वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये !
[kavita ke fonts bahut small hain---]
December 31, 2008 at 3:42 pm |
आपको भी नए साल की असीम शुभकामनाएँ
सादर