कड़ी जो जोड़ती है-
कर्तव्य को अधिकार से,
वाणी को व्यवहार से,
सादगी को श्रृंगार से,
नफ़रत को प्यार से ।
कड़ी जो जोड़ती है -
अमीर को फ़कीर से,
आत्मा को शरीर से,
प्रसन्नता को पीर से,
जोशीलेपन को धीर से |
कड़ी जो जोड़ती है-
संस्कृति को सभ्यता से,
बड़प्पन को महानता से,
भौतिकता को नैतिकता से,
आदर्शवाद को व्यावहारिकता से ।
कड़ी जो जोड़ती है-
फ़ैशन को शालीनता से,
पुरातन को नवीनता से,
अहंकार को हीनता से,
सरलता को गंभीरता से ।
कड़ी जो जोड़ती है-
दिल को दिमाग से,
पानी को आग से,
मनोरंजन को वैराग से |
कड़ी जो जोड़ती है-
अध्यात्म को विज्ञान से,
श्वाँस को प्राण से,
अस्थिरता को विराम से ।
कड़ी जो जोड़ती है-
जवानी को बुढ़ापे से,
आँगन को अहाते से ।
कड़ी जो जोड़ती है-
पूरब को पश्चिम से,
आदि को अंतिम से ।
कड़ी जो जोड़ती है-
तुच्छ को महान से,
इंसान को भगवान से,
इंसान को इंसान से ।
वो कड़ी कहीं खो गयी है शायद ।
क्या हममें है वो लचक,
कि हम बन सकें वो कड़ी ?
March 13, 2008 at 2:57 pm |
very nice poem… keep it up.
March 13, 2008 at 4:44 pm |
बहुत ही बढ़िया रचना. भाई बधाई आप को. मन को भा गई, मन पर छा गई. सोचने लगा मेरे जैसा इंसान भी !
March 13, 2008 at 6:32 pm |
Excellent Job !!
Its really a kadi jo jod rahi hai bhai ko bahan se , putra ko ma se ….
I wish aapki kavitayein bane woh kadi jo d sake bhawnao ko karm se , kathani ko karni se…
With Love Swati Didi
March 14, 2008 at 5:36 am |
prerak aur marmsparshi rachna.
May 15, 2008 at 9:30 am |
gayatri parijan to unhe bas gurudev se jodein jo gayatri pariwar ke sadasya nahi hain
May 16, 2008 at 4:55 am |
I have never seen or read such rhythmic and relevant poem by a non-professional poet!
Certainly u are gifted with this art, May u be master in it.
July 5, 2008 at 9:48 pm |
awesome! Great poem. Hope to see more of these.
July 22, 2008 at 11:44 am |
आश्वासन ( गुरुदेव )
तुम न घबराओ न आंसू ही बहाओ अब,
और कोई हो न हो, पर मैं तुम्हारा हूँ |
मैं खुशी के गीत गा-गा कर सुनाऊंगा,
तुम न घबराओ…………………………||
मानता हूँ ठोकरें तुमने सदा खाईं,
जिंदगी के दांव में, हारें सदा पाईं |
बिजलियाँ दुःख की, निराशा की सदा टूटीँ,
मन गगन पर वेदना की बदलियाँ छाईं |
पोंछ दूँगा मैं तुम्हारे अश्रु गीतों से,
तुम सरीखे बे-सहारों का सहारा हूँ |
मैं तुम्हारे घाव धो मरहम लगाऊँगा,
मैं विजय के गीत गा-गा कर सुनाऊंगा |
तुम न घबराओ…………………………||
खा गई इंसानियत को भूख यह भूखी,
स्नेह ममता को गई पी प्यास यह सूखी |
जानवर भी पेट का साधन जुटाते हैं,
जिंदगी का हक़ नही है रोटियां रूखी |
और कुछ माँगो हँसी माँगो खुशी माँगो,
खो गए हो, दे रहा तुमको इशारा हूँ |
आज जीने की कला तुमको सिखाऊंगा,
जिन्दगी के गीत गा-गा कर सुनाऊंगा |
तुम न घबराओ…………………………||
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आपके स्नेहाधीन
राजेंद्र माहेश्वरी
पोस्ट- आगूंचा , जिला – भीलवाडा, पिन – ३११०२९ ( राजस्थान ) भारत
ईमेल personallywebpage@gmail.com
स्वरदूत – 01483-225554, 09929827894
July 29, 2008 at 4:33 am |
simply gr8 combination of words very sweet & short poems which tell us a lot
January 7, 2009 at 6:05 pm |
Truly Heart Touching..
I always love reading your poems..