आह्‌वान

mashal.jpg

युवा,

जिसका चिंतन कभी वृद्ध नहीं हुआ ।

जिसे विश्वास है अपने-आप पर ।

जिसमें उमंग है, साहस है, जोश है,

कुछ कर-गुजरने का ।

जो सक्षम है, हवाओं का रूख मोड़ने में ।

युवा,

जिसे भय नहीं, कितना भी गहरा तम हो ।

जिसे संशय नहीं रत्ती भर भी अपनी जीत पर ।

जिसकी आँखों में स्वप्न है,

एक “उज्जवल भविष्य” के निर्माण का ।

युवा,

जो कभी जीता नहीं,

अपनी प्रसिद्धि या पहचान के लिए ।

जो जीता और मरता है तो बस,

अपने मूल्यों के आन के लिए ।

युवा,

जिसे गर्व है, अपनी संस्कृति पर ।

जिसे भान है, अपनी मर्यादा का ।

जिसे बोध है, अपने कर्तव्यों का ।

———————————————–

आवाहन है, आमंत्रण है,

ऐसे सभी युवाओं का,

इस युग-संधि की वेला में ।

कि अब वक्त आ गया है,

अपनी-अपनी भूमिका निभाने का ।

अपने प्रतिभा-परिष्कार से,

और अपने चरित्र-चिंतन-व्यवहार से,

समस्त विश्व के सामने,

एक उदाहरण प्रस्तुत करने का ।

ताकि गूँज उठे यह प्रतिध्वनि चारों ओर,

कि- “हे असुरता,

अब समय आ गया है,

कि तुम दूर हो जाओ,

मानव-मात्र की मानसिकता से ।

वरना, कहीं इस विचार-क्रांति की ज्वाला में,

तुम्हें तिल-तिल जलकर मरना न पड़े ।”

————————————————————-

*युवा चेतना शिविर, पुणे (भारत)

८ से १० जून २००७

सम्पर्क : shrrutankur@gmail.com

5 Responses to “आह्‌वान”

  1. vivek singh Says:

    THE BEST ONE
    among all that i have read.

  2. paramjitbali Says:

    अच्छा लिखते हो । बधाई । लेकिन आज युवाऒ के चरित्र की बात का तो भगवान मालिक है। आज धन कमाना और दिखावा करना ज्यादा तर युवाऒ का काम रह गया हैं।

  3. Jitu Says:

    हिन्दी ब्लॉगिंग मे आपका स्वागत है। आप अपना ब्लॉग नारद पर रजिस्टर करवाएं। नारद पर आपको हिन्दी चिट्ठों की पूरी जानकारी मिलेगी। किसी भी प्रकार की समस्या आने पर हम आपसे सिर्फ़ एक इमेल की दूरी पर है।

  4. anuradha Says:

    JG Bhaiya,

    bahut accha likha hai…sach me hridyasparshi hai.
    likhte rahe…………

  5. Chetanya Says:

    Swami Vivekanand ke vicharon se milte julte vichar likhe.

    Man khush hua ke aaj b vo vichar yuva pidhi me mojud he,

Leave a Reply