सोहम् (मैं वही हूँ) – मैं वही हूँ, जिसे नियन्ता ने सर्वश्रेष्ठ मानव योनि में भेज दिया। मेरे लिये उच्च मानवीय क्षमताएँ सहज-सुलभ हैं। मैं साधक हूँ, जिसे युग-ऋषि ने युग-तीर्थ में रहकर साधना करने का अवसर दिया। साधक का कोई क्रम मेरे लिये कठिन क्यों होगा।
आभार – शान्तिकुंज हरिद्वार (भारत)