ईश्वर की सौंपी हुई और सीना खोलकर स्वीकार की हुई जिम्मेदारी (युग निर्माण योजना) को छोड़कर भागना- यह अपने वश की बात नहीं । इस ईश्वरीय इच्छा की उपेक्षा करके अपनी असुविधाओं की चिंता करना हमलोगों के लिए अशोभनीय होगा । ऐसे अशोभनीय जीवन से तो मरना अच्छा ।
अब हमारे सामने एक मात्र कर्तव्य यही है कि हम धर्मयुग लाने की महाप्रक्रिया को पूर्ण करने के लिये अपना सर्वस्व दाँव पर लगा दें ।
- वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पं० श्रीराम शर्मा आचार्य
July 22, 2008 at 11:30 am |
नवयुग यदि आएगा तो विचार शोधन द्वारा ही, क्रान्ति होगी तो वह लहू और लोहे से नही, विचारो की विचारो से काट द्वारा होगी, समाज का नवनिर्माण होगा तो वह सद् विचारो की स्थापना द्वारा ही संभव होगा |
आपके स्नेहाधीन
राजेंद्र माहेश्वरी
पोस्ट- आगूंचा , जिला – भीलवाडा, पिन – ३११०२९ ( राजस्थान ) भारत
ईमेल personallywebpage@gmail.com
स्वरदूत – 01483-225554, 09929827894