अमृतवाणी-१

जो बात अनुचित है, उसे हृदय में अनुचित ही मानिये । आप इसका त्याग नहीं कर पा रहे हैं, यह दूसरी बात है ।चूँकि हम बीमार हैं, इसलिए बीमारी अच्छी चीज है, यह मानना य खुद समझना कोई बुद्धिमानी की बात नहीं है। मनुष्य भूलों, कमजोरियों और बीमारियों से मुक्त नहीं है, आप भी उनसे मुक्त नहीं हैं ।

हमें अपनी कमजोरियों को समझना चाहिए और उनके विरुद्ध विद्रोह जारी रखना चाहिए, चाहे वह विद्रोह कितना भी मन्द क्यों न हो । जो बुराई है, उसे बुराई ही समझना चाहिए और उसके विरुद्ध लड़ाई जारी रखनी चहिए ।

180px-gurudev.jpg- वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पं० श्रीराम शर्मा आचार्य

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