ए अमरवीर , ए भरतपुत्र
बता तुझको हुआ क्या है ?
परिस्थितियों का दास बनकर,
खो दिया उल्लास तुमने,
अपने बाजुओं की ताकतों का
क्या किया कभी आभास तुमने ?
मत रो कि तुम वीरपुत्र हो,
उठ खड़े हो -
अभी लुटा क्या है ?
लेके आये थे मानव जन्म,
और पशु सा जीवन हो गया |
पेट – प्रजनन में ही न जाने,
जीवन लक्ष्य कहाँ पे खो गया ?
किस नशे में धुत तू पड़ा,
जरा सोच -
ज़िन्दगी से तेरा रिश्ता क्या है ?
संस्कृति का खुले आम,
हो रहा है मान मर्दन ;
आज अनैतिकता, आतंक से
मानवता कर रही क्रंदन
और खौलता नहीं तेरा लहू ,
जरा सोच -
इसमें मिला क्या है ?
हे युवा !उठो, जागो
और लक्ष्य पाने तक रुको नहीं,
आंधी आये या तूफ़ान,
अपने आदर्शों से झुको नहीं |
आने दो हवाओं को पास अपने,
वो पूछेंगे इक दिन -
बता तेरी दिशा क्या है ?
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आमंत्रण
राष्ट्र कुण्डलिनी युवा शक्ति के जागरण हेतु
युवा चेतना शिविर, आलंदी ( पुणे )
६-७-८ नवम्बर २००९
संपर्क – ९८८१२४७६५६, ९८८१७४०४३९
www.pune.awgp.org
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Posted by राजेश 'आर्य'